तुम नहीं थी तो दिल में क़रार न रहा,
दिन वही था मगर दिल में बहार न रहा।
आज न जाने क्यों सूना-सूना था ये दिल,
तेरे बिन कोई पल भी ख़ुशगवार न रहा।
वही ज़िंदगी, वही लोग, वही रोज़ का काम,
बस तेरे बिन किसी चीज़ में इंतज़ार न रहा।
तुम्हें देखे बिना भी दिन तो गुज़रना था मगर,
तेरे बिन इस दिल को ख़ुद पर इख़्तियार न रहा।
अजीब रिश्ता है—कह भी नहीं सकते तुमसे,
तुमसे मिलने का कोई दावा हर बार न रहा।
कल जो आओगी तो शायद ये दिल खिल उठे,
आज तो चेहरे पे ज़रा भी निखार न रहा।
तुमसे मोहब्बत है, ये कहना भी जल्दबाज़ी है,
मगर तुम बिन ये दिल अपना ख़ुददार न रहा।
तुम एक वफादार ही खोजती हो प्रिंस के भीतर भी
तुमसे इश्क़ नहीं ,ये झूठ बोल कर मैं वफादार भी ना रहा।