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तुम नहीं थी तो

                
                                                         
                            तुम नहीं थी तो दिल में क़रार न रहा,
                                                                 
                            
‎दिन वही था मगर दिल में बहार न रहा।
‎आज न जाने क्यों सूना-सूना था ये दिल,
‎तेरे बिन कोई पल भी ख़ुशगवार न रहा।
‎वही ज़िंदगी, वही लोग, वही रोज़ का काम,
‎बस तेरे बिन किसी चीज़ में इंतज़ार न रहा।
‎तुम्हें देखे बिना भी दिन तो गुज़रना था मगर,
‎तेरे बिन इस दिल को ख़ुद पर इख़्तियार न रहा।
‎अजीब रिश्ता है—कह भी नहीं सकते तुमसे,
‎तुमसे मिलने का कोई दावा हर बार न रहा।
‎कल जो आओगी तो शायद ये दिल खिल उठे,
‎आज तो चेहरे पे ज़रा भी निखार न रहा।
‎तुमसे मोहब्बत है, ये कहना भी जल्दबाज़ी है,
‎मगर तुम बिन ये दिल अपना ख़ुददार न रहा।
‎तुम एक वफादार ही खोजती हो प्रिंस के भीतर भी
‎तुमसे इश्क़ नहीं ,ये झूठ बोल कर मैं वफादार भी ना रहा।
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48 मिनट पहले

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