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फसाना ए रस्म ए उल्फत

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी सोचता हूं मर जाऊंगा मैं बेमौत गम ए उल्फत के सदमे से क्या पता कशिश दिल की हमें ले जाएगा किधर
        
                                                    
                            
सुबह ओ शाम करता हूं दिल बेचैन कितनी बार दिल तोड़ चुका मैं ये बता नादां दिल मेरा अब ले जाएगा किधर
बहा कर आंखों से आंसू दो घूंट जहर का मैं पी रहा हूं दिल भी अब क्या जाने ये जुनून हमको ले जाएगा किधर
मिटा के अपनी हस्ती दरिया में डूबना चाहता हूं देखना भी हमें ये है डुबा कर दरिया हमें ही ले जाएगा किधर
असर दिल पे तुम्हारी बेरुखी का हुआ जरूर किया भरोसा जो मैने आप पर बता दो हमें तू ले जाएगा किधर

 
एक घंटा पहले
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