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फसाना ए रस्म ए उल्फत

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तड़पती यादों को भी चैन से जीने दो दिल मेरा कोई पत्थर नहीं जता कर तुम बेखुदी अपनी फैसला हमें बदलने दो
        
                                                    
                            
कह के बात दिल की तुमसे फिर भी जुदा हो ना पाऊंगा परख कर अंदाज़ आपका अब तो आज हमको कहने दो
है ये दुनिया अजीब कितनी जान कर मिजाज़ वक्त का घबराए भी जरूर आकर सामने तेरे अब दर्द हमें कहने दो
बेचैन दिल ने भी दिया दर्द हमें बहुत लाकर करार दिल में हुआ जो बेकरार खुदा कसम आज तो सच हमें कहने दो
मजबूरी से बढ़ कर कोई सजा नहीं ये तुम क्या जानो बुझा कर चिराग़ ए दिल अपना अब फैसला कोई हमें लेने दो
18 घंटे पहले
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