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फसाना ए बिखरती यादें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके ऐतबार तमन्नाओं पर दर्द बढ़ाया नहीं जाता समझ कर अपना हर किसी को दर्द बताया नहीं जाता
        
                                                    
                            
होगा अंजाम ए वफा बुरा ये सोचा नहीं जाता जला के चिराग़ दिल में होकर मायूस दर्द बढ़ाया नहीं जाता
बिछड़ कर यादों के मंजर में खो जाना पड़ा समझ के गैर हमें फासला बार बार कभी बढ़ाया नहीं जाता
दर्द सिर्फ ये समझ कर तुम्हें अपना चिराग़ ए दिल जलाया है राह ए वफा दोस्त को सताया नहीं जाता
सता कर बेचैन दिल दर्द कितना हम बढ़ाए देख के अचानक सामने अरमां किसी का मिटाया नहीं जाता
11 घंटे पहले
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Prasoon Saxena

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