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फसाना ए बिखरती यादें

                
                                                         
                            करके ऐतबार तमन्नाओं पर दर्द बढ़ाया नहीं जाता समझ कर अपना हर किसी को दर्द बताया नहीं जाता
                                                                 
                            
होगा अंजाम ए वफा बुरा ये सोचा नहीं जाता जला के चिराग़ दिल में होकर मायूस दर्द बढ़ाया नहीं जाता
बिछड़ कर यादों के मंजर में खो जाना पड़ा समझ के गैर हमें फासला बार बार कभी बढ़ाया नहीं जाता
दर्द सिर्फ ये समझ कर तुम्हें अपना चिराग़ ए दिल जलाया है राह ए वफा दोस्त को सताया नहीं जाता
सता कर बेचैन दिल दर्द कितना हम बढ़ाए देख के अचानक सामने अरमां किसी का मिटाया नहीं जाता
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8 घंटे पहले

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