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फसाना ए बेकरार दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बढ़ा के ख्वाब ओ तमन्ना दर्द सीने का बढ़ाया नहीं करते होकर मायूस जिंदगी से दर्द अपना कभी बताया नहीं करते
        
                                                    
                            
निभाना रस्म ए वफा है मुश्किल बहुत समझ के हर किसी को अपना बार बार मोहब्बत में आजमाया नहीं करते
करके दोस्ती कांटों से मगर वफा निभाना पड़ा है गुज़ारा है वक्त होकर खामोश बात राज़ की भी बताया नहीं करते
गर उड़ा कर ले जाए ख्वाब कोई तो दर्द नहीं मगर उड़ा के नींद अपनी ले जाए तो हुआ जो दर्द सुनाया नहीं करते
मिल कर तुमसे जुदा ना हो पाए दिल से हम करके मायूस दिल बार बार हौसला किसी का कभी मिटाया नहीं करते
6 घंटे पहले
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