मिल कर तुमसे बिछड़ना नसीब था क्या बताऊं मैं तुम्हें फिर भी दिल मेरा हमेशा तेरे करीब था
अंजाम ए वफा होगा बुरा इतना सोचा न हमने माना कि तू था खफा मगर मैं दिल से करीब था
तुम्हें क्यूं पेड़ में लिखे नाम मिटने का है गम मैं बदलते मौसम में भी तो दिल से तेरे करीब था
तुम अब परिंदे की तरह अब उड़ना छोड़ दो मैं दिल से बुरा नहीं तभी तो दिल मेरा तेरे करीब था
अब ये बता तुम कौन सी कमी मेरी ख्याल ओ ख्वाब में है सुबह ओ शाम दिल मेरा तेरे करीब था