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बेचैन दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दरकार था हमें होकर मायूस करीब तेरे आज आना पड़ा समझ कर मिजाज़ देकर आवाज तुम्हें बुलाना पड़ा
        
                                                    
                            
मैं भुला भटका इक नादां मुसाफिर दर्द तुमसे ही कहना चाहता हूं करके अर्ज तुमसे ही दर्द सारा बताना पड़ा
सुना के हाल ए गम अपना तुमसे गुजारिश करना पड़ा है सामने तेरे आया हूं क्यूं मजबूरी हमको बताना पड़ा
इक तुम हो जो लौ चिराग की कम करते नहीं दर्द का कभी कद्र करो बजा के धुन सितार पर दर्द सुनाना पड़ा
निकल के हैरतों से कहना पड़ा ये जो जश्न तुम मना रहे हो मेरी बर्बादी पे रो दोगे अब पे सच तुमसे कहना पड़ा

 
2 घंटे पहले
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