आया जो झोंका वक्त का ख्वाब सारे मेरे उड़ा ले गया कयामत ये तेरे दर से उठा के ले गया ये सच हमें सोचना पड़ा
था मिजाज़ वक्त का भी अजीब कितना सोचना पड़ा हमें जी के गम ए दौर में किसी तरह चिराग ए दिल बुझाना पड़ा
मिलती है जिंदगी चैन ओ सकूं की बड़े नसीब से और जला कर दिल मेरा बार बार आजमाया जा रहा ये सोचना पड़ा
हुआ कब तुम्हें एहतराम मुझ पे समझ ना पाया अभी तक लगा के इल्जाम सताया हमें क्यूं जा रहा है दर्द कहना पड़ा
गर नहीं कोई वादा तो सिर्फ इक हादसा ही दे जाओ निभा कर वफा शिद्दत से फिर भी कांटों पर बार बार चलना पड़ा