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अंदाज़ ए बेचैन ख्वाहिश

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
कैसी मजबूरी है न कुछ कह सकता न शोर कर सकता बस अब अपनी किस्मत पे रो सकता हूं
ख्वाहिशें सारी सीने पे रख कर रोज यही उम्मीद करूं कभी दस्तक हो दरवाजा खोल सकता हूं
अब तो तन्हाइयों से दिल लगा लिया मैंने खुद से बात करता हूं तुझे भूलने का हौसला रखता हूं
रात हो गई गर तुम चाहो तो सो जाओ मेरा क्या है मै रोज रात भर जागने का हौसला रखता हूं
तुझे अपनी दिल की बात बतानी है सोचता हूं और मुमकिन हो कैसे वो सलीका खोजता रहता हूं
2 घंटे पहले
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