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अंदाज़ ए बेचैन ख्वाहिश

                
                                                         
                            
कैसी मजबूरी है न कुछ कह सकता न शोर कर सकता बस अब अपनी किस्मत पे रो सकता हूं
ख्वाहिशें सारी सीने पे रख कर रोज यही उम्मीद करूं कभी दस्तक हो दरवाजा खोल सकता हूं
अब तो तन्हाइयों से दिल लगा लिया मैंने खुद से बात करता हूं तुझे भूलने का हौसला रखता हूं
रात हो गई गर तुम चाहो तो सो जाओ मेरा क्या है मै रोज रात भर जागने का हौसला रखता हूं
तुझे अपनी दिल की बात बतानी है सोचता हूं और मुमकिन हो कैसे वो सलीका खोजता रहता हूं
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एक घंटा पहले

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