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अफसाना ए गम ए जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगता है हम अब तेरी मेहरबानी पे जीने लगे हैं फिर भी ना जाने क्यूं उदास होने लगे हैं
        
                                                    
                            
तूने मेरे हिस्से की चाह किसी और को बाट दी है सोच कर हम अब मजबूर होने लगे हैं
बिछड़ कर तुमसे हसरतें अपनी मिटा दी है करूं क्या बगैर तेरे मरने को सोचने लगे हैं
राह ए तलब चल कर कांटों पर तुमसे दूर हो रहे हैं ऐ जिंदगी हम नाकाम होने लगे हैं
हाल ए दिल अब तुम्हें बताने से फायदा भी क्या सुना कर दर्द तुम्हें हम दूर होने लगे हैं
2 घंटे पहले
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विजय कुमार

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