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ऐसा मेरा देश है

prem bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है भारत देश एक लेकिन भाषाएं अनेक हैं, अनेकता में बसती एकता,धर्म यहां अनेक हैं,
        
                                                    
                            
है धरती ये ऋषियों की, जन्मे यहीं पर देव हैं,जन्मी यहीं लक्ष्मीबाई, सीता-सावित्री का ये देश है,
लोकतंत्र का बोलबाला यहां, आज़ाद विचारों का ये देश है,
अनेकता में बसती एकता ऐसा मेरा भारत देश है।

ना तेरा , ना मेरा, ना यहां कोई मतभेद हैं,
रहते हैं हम सबके दिलों में,हिन्दू-मुस्लिम सब एक हैं ,
पावन मेरे देश की धरती गंगा-जमुना यहां बहती है,
संस्कार और संस्कृति से भरपूर हर घर में प्रवेश है,
अनेकता में बसती एकता ऐसा मेरा भारत देश है।

आठों पहर सीना तान खड़े सरहद पर जो वीर जवान, मेरे देश की वो आन-बान-शान है,
दुश्मन कांपे थर-थर जिससे, करता जो देश पे जान कुर्बान है,
सदा दयावान, ऐसा सेना का वीर जवान है,करोड़ों भारतीयों का वो अभिमान है,
जननी से रहता दूर है,सरहद ही उसका कुल प्रदेश है,
अनेकता में बसती एकता ऐसा मेरा भारत देश है,

छाती पर गोलियां खाता,मौत की छाया में जीवन रास रचाता मेरी सेना का वीर है,
तोपों के मुंह के आगे अपनी छाती अकड़ाता, फांसी के फंदे को भी खुशी से चूमता,
शत्रु सीमा लांघ ना पाए, खड़ा डट कर सीमा पर वीर है,
नहीं रखता सैनिक चाह रंगीन बहारों की, कांटों के पथ का करता वरण है,
किसी की आंख उठी देश की ओर, धूल चटाता उसे सेना का वीर है,
सेना की गाथा सुनाना है असंभव ऐसा मेरा भारत देश है।

ईद, दिवाली मनाते हैं सभी मिलजुल कर, धर्म-महजब का भेद नहीं,
भांति-भांति की बोली यहां, भांति-भांति की संस्कृति ,
भांति-भांति का पहनावा है , पर मिट्टी देश की यहां एक है,
कहीं पे पर्वत शोभा बढ़ाते हैं , कहीं झरने गुनगुनाते हैं , कहीं पे मन्दिर तो कहीं मस्जिद के झंडे लहराते है,
गांधी के अंखड भारत का सपना बरकरार है, सोने की चिड़िया मेरा देश है,
यहां राम की रामायण, कृष्ण की लीला और दुर्योधन की महाभारत है फिर भी हम एक हैं, ऐसा मेरा भारत देश है,
जहां अनेकता में बसती एकता ऐसा मेरा देश है।
-प्रेम बजाज
एक वर्ष पहले
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