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नूतन राव के दोहे_ मन की पीर

Pratap S

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नूतन अपना मानकर, कहो न मन की पीर।
        
                                                    
                            
दुखती नब्ज़ टटोलकर, मारत है सब तीर।।
_सत्येंद्र पटेल "नूतन राव"
3 घंटे पहले
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