सुरमई शाम है
पलकों पर सजे हैं
ढेर सारे ख्वाब
आंखों मे चमक है
अधरों पर मुस्कान
पर जाना है तुम्हें
ख्वाहिश यह मेरी
पा लूं एक दिन तुम्हे
हाथों मे लिए तेरा चेहरा
निहारता फिरूं अपलक
खुदा मेहरबां है
पर जाना है तुम्हें
ख्वाबों पे दस्तक हुयी
फिजाओं मे संगीत घुला है
वही परिचित देह-गंध
नथूनों मे समायी है
तमन्नाएं बेकाबू हैं
पर जाना हैं तुम्हें
मन उदास है
बेकल और बेचैन
आंखों के कोर से
ढलक आते हैं आंसू
सांसे बोझिल हैं
पर जाना हैं तुम्हें
- प्रकाश रंजन 'शैल'
मो 7762041111
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