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मोक्ष

Pradeepti Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काल के ना जाने कौन से क्षण में,
        
                                                    
                            
ये प्रक्रिया आरम्भ हुई-
चिदाकाश के दायरे ओझल होने लगे,
रिक्त होने लगा स्मृतियों का पात्र,
रिसने लगे उसमें से भावों के रंग,
घुलने लगे वो यूँ हौले हौले,
महाकाश की अपरिमितता में,
किसी अज्ञात विशाल कुंड में |
ये ही यात्रा है,
आत्मान के ब्रह्मन् से युति की |
ये ही यात्रा है,
मोक्ष की |

-प्रदीप्ति

 
3 वर्ष पहले
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