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विश्व कप क्रिकेट 2011 विषय प्रवेश भाग एक

Pradeep Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            

1971 में हुआ बीजारोपण,
विश्व कप क्रिकेट का।
प्रूडेंशियल बनी प्रायोजक,
1975 में श्रीगणेश हुआ।।

आठ टीमें पहुंची इंगलैंड ,
पहले विश्व कप में लेने भाग।
आगे बढ़ा क्रिकेट जगत,
रचने को एक नया इतिहास।।

नई खुशी, नया उत्साह,
भिड़ने को सब हुए तैयार।
पंद्रह मैच हुआ निर्धारित,
फाइनल में पहुंचे धुरंधर।।


वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया पर,
फाइनल में पड़ा भारी।
17 रन से आस्ट्रेलिया को हरा,
पहले विश्वकप पर मुहर लगाई।।

चार साल बाद आया शुभ दिन,
प्रूडेंशियल बनी फिर प्रायोजक।
इंगलैंड में फिर हुआ आयोजन,
उतनी ही टीमें, उतने ही मैच।।

फाइनल में भिड़े इस बार,
वेस्टइंडीज और इंगलैंड।
इतिहास फिर यहां दोहराया,
वेस्टइंडीज से हार गया इंग्लैंड।।

बानबे रन से मिली पराजय,
वेस्टइंडीज बना फिर सरताज।
कब्जा किया पुनः विश्व कप पर,
खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित कर।।

1983 एशिया हेतु यादगार बना,
जब भारत ने वहां चमत्कार किया।
इस बार भी रण क्षेत्र रहा इंगलैंड,
प्रूडेंशियल फिर बनी प्रायोजक यहां।।

टीमें थी आठ, सत्ताइस था मैच,
पर कहीं से कम नहीं था रोमांच।
उसमें एक भारत वर्ष भी था,
आंख गड़ाए विश्व कप क्रिकेट पर।।

जिंबाब्वे के खिलाफ कपिल,
खेले गए एक मैराथन पारी।
भरपूर हुआ सबका मनोरंजन,
दर्शक झूमे, झूमे खिलाड़ी।।

175 रन नाबाद अकेले बनाया,
असंभव को संभव कर दिखाया।
विश्व पटल पर भारत का,
मजबूती से तिरंगा फहराया।।

भारतीय टीम में आत्मविश्वास जगा,
छुपा रुस्तम फाइनल तक में पहुंचा।
सामने वेस्टइंडीज हर तरफ से भारी,
लेकिन भारतीय टीम हिम्मत नहीं हारी।।

कर दिया उलटफेर यहां पर,
भारत 43 रन से मैच जीत गया।
मोहिंदर अमरनाथ ने कमाल किया,
छब्बीस रन बनाया,
12 रन दे तीन विकेट भी चटकाया।।

वेस्टइंडीज की इच्छाओं पर पानी फेरा,
हैट्रिक का सपना उनका चकनाचूर किया।
भारतीय क्रिकेट को नई बुलंदी पर पहुंचाया,
भारत को पहली बार विश्व कप दिलाया।।
2 वर्ष पहले
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