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दर्द उभरा तो शायरी बनी

Pooja Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द कुछ यूँ उभरा के एक शायरी बनी
        
                                                    
                            
ज़िन्दगी बिखरी बेहिसाब तो शायर बना
खींच कर लकीरें आंसुओं की जर्द से
लफज़ो को मिलकर एक अदायगी बनी
भीगोया दर्दे दरिया में अपना रोम रोम
तब जाकर जनाब कुछ वाहवाही मिली
दर्द कुछ यूँ उभरा के एक शायरी बनी

लड़ती है रोज़ मुझसे तनहाइयाँ अक्सर
न तुझसे ज्यादा तन्हा न लाजवाब कंही
आ बैठ बेफिक्र हो कर तू साथ हमारे
लिखें मिलकर दोस्ती की एक दास्तां नई
दर्द कुछ यूँ उभरा के एक शायरी बनी
जिन्दगी बिखरी बेहिसाब तो शायर बना
 
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