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जिंदगी की मँझधार

piyush yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "जिंदगी की मँझधाऱ"
        
                                                    
                            

उम्मीदो़ं की पतवार हो,
धैर्य की अपनी नाव हो |
जैसी भी हो जिंदगी,
बस जीने में प्यार भरा बहाव हो |
जीते जाओ अपने सपने,
बस अपनो से न कभी अलगाव हो |
किनारे देते है जैसे नदियों का साथ,
बस अापस में भी वैसा ही स्वभाव हो |
सुख-दुख, सफलता-असफलता को समझो जैसे पानी की लहरें,
बस जीवन को जीने में अपना भी ऐसा प्रभाव हो ||


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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