तेरी ही याद, तेरा ज़िक्र बारहा होगा
खुशी में गम का ही आलम छुपा हुआ होगा
तू मेहमाँ बन के मिरे दिल में रहता है दिन रात
मैं एहतिराम करूँ तेरा, तू ख़ुदा होगा
मेरा हो कर भी तू मेरा नहीं रहा है अब
मुझे यकीन न था ऐसा हादसा होगा
नज़र बचा के चला तू गया मेरे जहां से
ये भी न सोचा कि दिल कैसे यूँ जुदा होगा
ग़म-ए-फ़िराक़ ने हमको बदल दिया 'पारुल'
अगर तू मिल भी गया तो भी क्या मज़ा होगा