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मुलाकात अभी बाकी

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
मुख़्तसर सी ग़म की ये रात अभी बाकी है,
सुनहरी सहर से मुलाकात अभी बाकी है।

सदा रहता नहीं कितना भी हो गहरा अंधेरा,
दामन में उजाले की ख़ैरात अभी बाकी है।

उतर जाएगा दर्द का क़र्ज़ एक न एक दिन,
मुकद्दर में खुशियों की सौगात अभी बाकी है।

पूरे हो जाएंगे अधूरे ये अरमान सारे देखना,
मेरे अरमानों की तो बारात अभी बाकी है।

उम्र यूं ही बीत गई सारी तो क्या 'पारुल',
दिल तो जवान है मुझमे बात अभी बाकी है।
2 वर्ष पहले
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Prasoon Saxena

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