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यहाँ ज़िंदा हो के भी सब हैं मुर्दा ज़िन्दगी में

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खडा चौराहे पर हर शख़्स तन्हा ज़िन्दगी में
        
                                                    
                            
जिधर देखो उधर दिखता अंधेरा ज़िन्दगी में

दिखाई दे रहे हैं सब कुशादा ज़िन्दग़ी में
ग़मों की धूप में हर कोई झुलसा ज़िन्दगी में

हुजूम-ए-यास ने घेरा है सबको इस तरह से
नहीं दिखता किसी को अब उजाला ज़िन्दगी में

नज़र के सामने बीते हैं जाने कैसे मंज़र
दिखाई दे रहा कितना तमाशा ज़िन्दगी में

ये कैसी दर्द की आँधी चली 'पारुल' बताओ
यहाँ ज़िंदा हो के भी सब हैं मुर्दा ज़िन्दगी में
4 दिन पहले
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