विज्ञापन

अपनी रोशनी तलाशता कोई ख़्वाब।

Pari Nagar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये काली रात,
        
                                                    
                            
काले बादलों में छुपा ये चाँद,
जैसे अँधेरों के बीच
अपनी रोशनी तलाशता कोई ख़्वाब।

पाबंदियाँ लगा रहे हैं बादल इस पर,
मगर इसकी रोशनी को रोक नहीं पाए,
कितना भी घना हो अँधेरा,
ये अपनी चमक से रास्ता बना ही जाए।

ये बातें हमें बहुत कुछ सिखाती हैं,
ये दुनिया चाहे कितनी भी पाबंदियाँ लगाए,
हमें भी इस चाँद की तरह
काले बादलों के बीच से
अपनी रोशनी तलाशनी है।

हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों,
अपनी चमक को खोने नहीं देना,
क्योंकि अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो,
एक छोटी-सी रोशनी भी
उससे लड़ने का हौसला रखती है।
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjay

2 कविताएं

View Profile

Yunush khan

8164 कविताएं

View Profile