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अपनी रोशनी तलाशता कोई ख़्वाब।

                
                                                         
                            ये काली रात,
                                                                 
                            
काले बादलों में छुपा ये चाँद,
जैसे अँधेरों के बीच
अपनी रोशनी तलाशता कोई ख़्वाब।

पाबंदियाँ लगा रहे हैं बादल इस पर,
मगर इसकी रोशनी को रोक नहीं पाए,
कितना भी घना हो अँधेरा,
ये अपनी चमक से रास्ता बना ही जाए।

ये बातें हमें बहुत कुछ सिखाती हैं,
ये दुनिया चाहे कितनी भी पाबंदियाँ लगाए,
हमें भी इस चाँद की तरह
काले बादलों के बीच से
अपनी रोशनी तलाशनी है।

हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों,
अपनी चमक को खोने नहीं देना,
क्योंकि अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो,
एक छोटी-सी रोशनी भी
उससे लड़ने का हौसला रखती है।
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एक घंटा पहले

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