हम फूल बिछाना चाहते थे,
तुम्हारी राहों में,
तुम्हे रखना चाहते थे,
हरदम अपनी निगाहों में,
अपने पराए का भेद समझ लेते,
बसा लेते हम अपने भावों में।
-चंद्र दत्त शर्मा