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चांद के सामने चांद

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जगमगा उठा चांद में तेरा चेहरा,
        
                                                    
                            
एक बार फिर से आ जाऊं,
बाँधकर... मैं सेहरा !

चांद में भी आज बात है कुछ और,
चांद के सामने आया चांद, करो गौर।

सज संवरकर आई जब गौरी,
कौन से चांद की करूँ चोरी ?

एक चांद करे दूसरे चांद का इंतजार,
कौन सुंदर है किसी को नहीं एतबार?
-चंद्र दत्त शर्मा
3 दिन पहले
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