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बच गई जान

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस जमाने से बस पहचान छुड़ा कर आया हूं
        
                                                    
                            
खोने वाला था जो सम्मान छुड़ा कर आया हूं

जमीं तो छुड़ा ना सका इस भरी कश्मकश में
शुक्र है कम से कम आसमान छुड़ा कर आया हूं

एक दूजे के दुश्मन बने बस शैतानों के झुंड है
कैसे बताऊं मैं तुम्हे बस जान छुड़ाकर आया हूं

इस लुटे हुए इंसा पर खोने को कुछ बचा नहीं
खो कर सारा जहां बस मुस्कान छुड़ाकर आया हूं
-नीटू मावी
2 घंटे पहले
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