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जब याद मुझे आती है माँ

Neerja Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब याद मुझे आती है मां
        
                                                    
                            
ये आंखें भर भर जाती हैं

तेरी बाहों में खेलती थी मैं
तेरे आंचल में बीता बचपन
जब आंख मिचौली खेलते हम
गुड़िया गुड़िया तू बुलाती थी
मैं मन ही मन मुस्काती थी
जब थककर तू सुस्ताती थी
मैं झट से गले लग जाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,

जब थाली लेकर आती थी
मैं इधर-उधर हो जाती थी
आजा मेरी गुड़िया रानी
कह के पास बुलाती थी
क्या जादू था तेरे हाथों में
दो रोटी एक हो जाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती है,

जब पापा आंख दिखाते थे
डर के मैं सहम जाती थी
नन्हीं है बहुत मासूम है ये
लाओ इसको समझाती हूं
कह के पापा से बचाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,

दिन भर की थकन से लौटूं जब
शीतल छाया बन जाती थी
अपनी ममता की छांव से
हर पीड़ा दूर भगाती थी
मिट जाता हर संताप मेरा
जब सीने से तू लगाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,

ना समझा था ना जाना था
एक दिन उड़ जाना होगा
मायके की गलियों को छोड़कर
एक नया आशियाना सजाना होगा
जो रूप धरा तूने इस घर में
वो वहां मुझे अपनाना होगा
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,

छोड़ चली तेरा आंचल मैं
अपना बचपन और हाथ तेरा
तू साथ रहे या ना हो मां
एहसास तेरा मुझ में रहता
आईना जब जब देखती हूं
तू मुझमें ही मुस्काती है
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं
ये आंखें भर भर जाती हैं...
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