जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं
तेरी बाहों में खेलती थी मैं
तेरे आंचल में बीता बचपन
जब आंख मिचौली खेलते हम
गुड़िया गुड़िया तू बुलाती थी
मैं मन ही मन मुस्काती थी
जब थककर तू सुस्ताती थी
मैं झट से गले लग जाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,
जब थाली लेकर आती थी
मैं इधर-उधर हो जाती थी
आजा मेरी गुड़िया रानी
कह के पास बुलाती थी
क्या जादू था तेरे हाथों में
दो रोटी एक हो जाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती है,
जब पापा आंख दिखाते थे
डर के मैं सहम जाती थी
नन्हीं है बहुत मासूम है ये
लाओ इसको समझाती हूं
कह के पापा से बचाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,
दिन भर की थकन से लौटूं जब
शीतल छाया बन जाती थी
अपनी ममता की छांव से
हर पीड़ा दूर भगाती थी
मिट जाता हर संताप मेरा
जब सीने से तू लगाती थी
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,
ना समझा था ना जाना था
एक दिन उड़ जाना होगा
मायके की गलियों को छोड़कर
एक नया आशियाना सजाना होगा
जो रूप धरा तूने इस घर में
वो वहां मुझे अपनाना होगा
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं,
छोड़ चली तेरा आंचल मैं
अपना बचपन और हाथ तेरा
तू साथ रहे या ना हो मां
एहसास तेरा मुझ में रहता
आईना जब जब देखती हूं
तू मुझमें ही मुस्काती है
जब याद मुझे आती है मां
ये आंखें भर भर जाती हैं
ये आंखें भर भर जाती हैं...
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