विज्ञापन

रेप पर तवायफ

Nawaz Sharif

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज रोज बच्ची की लुटती हुई आबरू
        
                                                    
                            
को देख कर तवायफ भी रो कर बोली
बिन पैसे ही आ जाओ मेरे पास हवस
के दरिंदों पर बच्चियों को बख्श दो

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all