उस शख्स को कभी मत भूलिए जो आपकी तंदुरुस्ती का मुहाफ़िज़ और पासबान है,
कोई और नहीं इन्सान खुद अपनी ज़हनी और जिस्मानी सेहत का और निगहबान है!
-एन. आर. कस्वाँ