विज्ञापन

नायाब शय

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब अपना पल्लू झाड़ने को बेताब हैं
        
                                                    
                            
ये कह कर कि ज़माना बड़ा ख़राब है!

अपने ऐब ओ नुक्स कोई नहीं देखता
इन्सान भी क़ुदरत की शय नायाब है!
-एन.आर. कस्वाँ
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

461 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13025 कविताएं

View Profile