सब अपना पल्लू झाड़ने को बेताब हैं
ये कह कर कि ज़माना बड़ा ख़राब है!
अपने ऐब ओ नुक्स कोई नहीं देखता
इन्सान भी क़ुदरत की शय नायाब है!
-एन.आर. कस्वाँ
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