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इन्सान अपने काम में इस क़दर खो जाए

Nathuram Kaswan

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                            इन्सान अपने काम में इस क़दर खो जाए
        
                                                    
                            
कि भाग्य और मुक़द्दर गैर ज़रूरी हो जाए
-एन. आर. कस्वाँ
एक घंटा पहले
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