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गुलख़न-ए-मशक़्क़त

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुलख़न ए मशक़्क़त में अगर कोई खुदको झोंक सकता है
        
                                                    
                            
उसके सपनों को साकार होने से भला कौन रोक सकता है
-एन. आर. कस्वाँ
 
2 घंटे पहले
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