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सत्य का शंखनाद

Narendra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सत्य का शंखनाद
        
                                                    
                            

आखिर कब तक मौन रहोगे, मिलकर साथ निभाने वालो।
सत्य-धर्म के पथ के रक्षक, मानवता अपनाने वालो।।1

राजहंस से निर्मल मन के, सत्य-सुधा बरसाने वालो।
द्वेष, कपट और झूठ मिटाकर, प्रेम-दीप जलाने वालो।।2

ज्यों इस तन के अंग सभी, अति महत्वपूर्ण बताते हैं।
छोटे-बड़े का भेद भूलकर, जीवन को पूर्ण बनाते हैं।।3

नाखून अगर बढ़ भी जाएँ, उँगली नहीं हटाई जाती।
फोड़ा-फुंसी होने पर भी, देह नहीं कटवाई जाती।।4

वैसे ही कटु वाणी, क्रोध और अहं मिटाना पड़ता है।
ईर्ष्या, स्वार्थ और छल से भी, नाता तोड़ना पड़ता है।।5

जाति-धर्म से ऊपर उठकर, सत्य शिखर पर होता है।
जैसा बोता कर्म मनुज, वैसा ही फल होता है।।6

इसलिए अब सत्य साध लो, झूठे झगड़े मिट जाने दो।
प्रेम, दया और मानवता का, फिर से दीप जलाने दो।।7

सच के साथी बनकर आगे, राष्ट्रधर्म अपनाना है।
मिल-जुलकर इस भारत को, स्वर्णिम पुनः बनाना है।।

 
4 महीने पहले
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