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इरादों के उड़ानों पर(युद्ध प्रेम काव्य)

Nandkumar Bhagwat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे इरादों के उड़ानों पर,तेरी आँखों के द्रोण हमला कर जाते हैं
        
                                                    
                            
चूर चूर होतें हैं सारे इरादे फिर भी,हम तेरे खयालों में खो जाते हैं

तेरी अदाओं के cluster बम,इस तरह दिल पर गिर जाते हैं
अनेकों टुकड़ों में बिखरकर दिल, तेरी राहों में शहिद हो जाते हैं

अमरिका ने चाहे ध्वस्त की हो,वायुसेना और नौसेना ईरान की
बिखरे गेसूं और आंखों के आंसू तुम्हारे,इनसे हम पस्त हो जाते हैं

इरादा बिलकुल नहीं हैं हमारा,तुमपर किसी तरह कोई sanctions लगानेका
हर फूल को होनी चाहिए आजादी,ये ही लहजा हैं हमारा सोचनेका

मगर तुम भी हॉर्मुज़ की खाड़ी की तरह,कोई प्रतिबंध मत लगाओ
जो भी आना चाहे उसे बिना कोई रोकटोक,घरके सामने से गुजरने दो
-नंदकुमार भागवत
3 महीने पहले
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