हमारे इरादों के उड़ानों पर,तेरी आँखों के द्रोण हमला कर जाते हैं
चूर चूर होतें हैं सारे इरादे फिर भी,हम तेरे खयालों में खो जाते हैं
तेरी अदाओं के cluster बम,इस तरह दिल पर गिर जाते हैं
अनेकों टुकड़ों में बिखरकर दिल, तेरी राहों में शहिद हो जाते हैं
अमरिका ने चाहे ध्वस्त की हो,वायुसेना और नौसेना ईरान की
बिखरे गेसूं और आंखों के आंसू तुम्हारे,इनसे हम पस्त हो जाते हैं
इरादा बिलकुल नहीं हैं हमारा,तुमपर किसी तरह कोई sanctions लगानेका
हर फूल को होनी चाहिए आजादी,ये ही लहजा हैं हमारा सोचनेका
मगर तुम भी हॉर्मुज़ की खाड़ी की तरह,कोई प्रतिबंध मत लगाओ
जो भी आना चाहे उसे बिना कोई रोकटोक,घरके सामने से गुजरने दो
-नंदकुमार भागवत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X