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एक नया जहां बसाए

Nandkumar Bhagwat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत हो चुकी जंग की बाते अब
        
                                                    
                            
कुछ प्यार की भी बाते कर लो
जी जाँ से निभाई अदावत जो अब
दोस्ती भी इंसानियत के नाते कर लो

नफरत की आग भड़की भी तो
ये अपनों को भी जलाती जाती है,
एक मुस्कान, एक मीठा लफ़्ज़,
सदियों की दूरी मिटाती जाती है

हाथों में हाथ लेकर निकले थे तो
आसान हो चले थे सारे ही रासते
खंजर निकालके क्या चलने लगे
वीरान हो चली दुनिया जीने के वास्ते

चलो आज फिर से नई कोशिश करें,
टूटे रिश्तों को जोड़ने का प्रयास करें,
जो जख्म दिए हैं हम ने एक दूसरे को,
उन्हें मोहब्बत से भरने की कोशिश करें।

ना जीत किसी की, ना हार किसी की,
बस इंसानियत का ही परचम लहराए,
जहां हर दिल को मन चाहा सुकून मिले
चलो फिर से क्यों न एक नया जहां बसाए
-नंदकुमार भागवत
3 महीने पहले
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