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याद आते रहना

Nagendra Yadav

Mere Alfaz
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                            हमे भी कोई याद करे
        
                                                    
                            
हमसे भी कोई हर रोज़ दो पल बात करे
हर वक़्त चेहरे पर मुस्कराहट रखना
क्या करे कुछ और आता नहीं है करना
बस इन्ही सब में दिन कट जाता
लेकिन रात काटना बहुत मुश्किल पड़ जाता
अगर आप होती तो मुझे नहीं लगानी पड़ती यह गुहार
बहुत आसानी से मिल जाता आहार
लेकिन कोई बात नहीं सीख़ लेंगे जीना थोड़े सालों में
बस हमेशा याद आते रहना मेरे ख्यालों में।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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