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भारत की बेटी दामिनी

monika yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो कौन सा दर है, जो मुझे अपनायेगा?
        
                                                    
                            
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
क्या कसूर था मेरा जो दी मुझे ये सजा?
क्यों मिली मुझे ये दर्दनाक मौत वेवजह?
कोई तो मुझे बताओ मेरे सपने अब कौन सजाएगा?
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
अपनों के साथ खुश थी मै बहुत
जिंदगी जीने की चाहत थी मुझमें बहुत
कोई तो बताओ मेरे अपनो को अब कौन हंसाएगा?
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
मुझे मौत देने वालों को सजा-ए-मौत नहीं
क्या मेरी जिंदगी की कोई अहमियत नहीं?
कोई तो मुझे बताओ मुझे इंसाफ अब कौन दिलाएगा?
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
मेरी मौत को युवा क्रांति कहा गया
और उन्ही आवाजों को लाठी तले दबा दिया?
कोई तो बताओ इस क्रांति का अंत क्या कहलाएगा?
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
लोग कहते हैं देश-विदेश में छाई थी
सियासत की नींव मैनें हिलाई थी
कोई तो मुझे बताओ क्या इससे मुझपे लगा दाग मिट पाएगा?
क्या एक बेटी का हक मुझे कभी मिल पाएगा?
आज भी बीच चौराहे पे खड़ी हूँ मैं
इस इन्तजार में की नया दौर आएगा
जो मुझे ही नहीं हर बेटी को उसका हक दिलाएगा
दामिनी के दामन के दाग को मिटाएगा......!!!!

मोनिका यादव


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