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मुद्दतों बाद जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा

Mohd Ajram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा
        
                                                    
                            

ख़ामोश दरियाओं को झरनों की वो धमक देगा,
जब वो आएगा तो सूरज को नई चमक देगा।

ये मुझसे पूछती हैं मेरे घर कि दीवारें
कि कब वो आके दर-ओ-बाम पे दस्तक देगा।

फिर किसी चाँद की ज़रूरत न रहेगी मुझको,
उसका चेहरा ही मेरी सियाह रातों को रौनक देगा।

दूरियाँ सदियों की मिट जाएँगी पल भर में, जलाल,
मुद्दतों बाद जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा।

 
2 घंटे पहले
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