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मुद्दतों बाद जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा

                
                                                         
                            जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा
                                                                 
                            

ख़ामोश दरियाओं को झरनों की वो धमक देगा,
जब वो आएगा तो सूरज को नई चमक देगा।

ये मुझसे पूछती हैं मेरे घर कि दीवारें
कि कब वो आके दर-ओ-बाम पे दस्तक देगा।

फिर किसी चाँद की ज़रूरत न रहेगी मुझको,
उसका चेहरा ही मेरी सियाह रातों को रौनक देगा।

दूरियाँ सदियों की मिट जाएँगी पल भर में, जलाल,
मुद्दतों बाद जब वो मेरे शहर में दस्तक देगा।

 
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एक घंटा पहले

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