वही सिकंदर कहलाए।
एक इम्तिहान की क्या बिसात जो तेरी तक़दीर बदल दे,
तेरी हिम्मत ही है जो तुझे हर मुश्किल से पार दिलाए।
माना कि आज अंधेरा घना है और राहें धुंधली हैं,
माना कि हर कोशिश तुम्हारी नाकाम सी लगती है।
पर याद रख,
हर रात के बाद ही सवेरा होता है,
तेरी मेहनत की आग ही तो असली सोना बनती है।
ये जो आँखों में आँसू हैं,
इन्हें अपनी ताक़त बनाओ,
निराशा के इस दौर को ज़रा अपनी ज़िद से हराओ।
तुम वो नहीं जो एक टूटे ख़्वाब से बिखर जाओ,
तुम वो हो जो अंगारों पर चलकर भी मुस्कुराओ।
थक गए हो तो थोड़ा ठहर जाओ,
पर हार मत मानना,
अपनी ही क़ाबलियत को आज फिर से पहचानना।
वक़्त बदलेगा,
ये दौर बदलेगा,
और मंज़िल भी मिलेगी,
बस अपनी इस कोशिश का सिलसिला मत थामना।