आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हारना मना है, अभी तो शुरुआत है

                
                                                         
                            
वही सिकंदर कहलाए।
एक इम्तिहान की क्या बिसात जो तेरी तक़दीर बदल दे,
तेरी हिम्मत ही है जो तुझे हर मुश्किल से पार दिलाए।
माना कि आज अंधेरा घना है और राहें धुंधली हैं,
माना कि हर कोशिश तुम्हारी नाकाम सी लगती है।
पर याद रख,
हर रात के बाद ही सवेरा होता है,
तेरी मेहनत की आग ही तो असली सोना बनती है।
ये जो आँखों में आँसू हैं,
इन्हें अपनी ताक़त बनाओ,
निराशा के इस दौर को ज़रा अपनी ज़िद से हराओ।
तुम वो नहीं जो एक टूटे ख़्वाब से बिखर जाओ,
तुम वो हो जो अंगारों पर चलकर भी मुस्कुराओ।
थक गए हो तो थोड़ा ठहर जाओ,
पर हार मत मानना,
अपनी ही क़ाबलियत को आज फिर से पहचानना।
वक़्त बदलेगा,
ये दौर बदलेगा,
और मंज़िल भी मिलेगी,
बस अपनी इस कोशिश का सिलसिला मत थामना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
45 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर