सुध-बुध खोती गोपियाँ,भर नैनों में नीर।।
उर में जगती प्रीत है, पहुँची यमुना तीर।
प्रेम खेल सबसे कठिन, करें प्रेम से जंग,
*सुनकर मुरली श्याम की, चढ़ा प्रीत का रंग।*
सच्ची प्रेम पुकार से, मिलते श्री भगवान।
प्यारे नन्द किशोर का,मिलता नित रसपान।।
हरि मनमोहन के लिए , सुरभित उठे उमंग,
*सुनकर मुरली श्याम की, चढ़ा प्रीत का रंग।*
मुख में रख ब्रह्मांड को, दिखा रहे नन्दलाल।
अपने सुंदर श्याम की, लीला परम विशाल।
शेष नाग पर देखकर, सब होते हैं दंग,
*सुनकर मुरली श्याम की, चढ़ा प्रीत का रंग।*
-मानसी मित्तल