आज भी चलता है, पैसे का इतना जोर,
कुर्सी पर चिपके हैं भ्रष्टाचारी, चोर
पैसे बिना सूना है, कोर्ट कचहरी,
पैसे के धूप से ही नौकरियां सुनहरी,
सीने में घुटता है ईमानदारी का शोर
कुर्सी पर........
सेनाओं की शूरता पर, उठाते सवाल हैं,
पूछो जरा इनसे भी, इनकी क्या मजाल है,
राजनीति का गंदा, खेल ये घनघोर,
कुर्सी पर..........
पढ़ लिखकर क्या करोगे, होगे बेरोजगार तुम,
अनपढ़ रहो, इक दिन ,होगे सरकार तुम,
वादों के भाषण से, अब जनता हो गई बोर,
कुर्सी पर....