आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पैसे का इतना जोर

                
                                                         
                            आज भी चलता है, पैसे का इतना जोर,
                                                                 
                            
कुर्सी पर चिपके हैं भ्रष्टाचारी, चोर

पैसे बिना सूना है, कोर्ट कचहरी,
पैसे के धूप से ही नौकरियां सुनहरी,
सीने में घुटता है ईमानदारी का शोर
कुर्सी पर........

सेनाओं की शूरता पर, उठाते सवाल हैं,
पूछो जरा इनसे भी, इनकी क्या मजाल है,
राजनीति का गंदा, खेल ये घनघोर,
कुर्सी पर..........

पढ़ लिखकर क्या करोगे, होगे बेरोजगार तुम,
अनपढ़ रहो, इक दिन ,होगे सरकार तुम,
वादों के भाषण से, अब जनता हो गई बोर,
कुर्सी पर....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर