बेघर बेखबर रहना चाहता है
आसमान की छत के नीचे
चलता फिरता घर चाहता है
मन बंजारा होना चाहता है
निर्मल उन्मुक्त जीवन चाहता है
नदी समान बहना चाहता है
महकी शीतल बयार चाहता है
मन बंजारा होना चाहता है ।
-मं शर्मा